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Monday, April 21, 2014

भागवत की दो कथाएं

#भागवत : 6.18 # 
<> कश्यप ऋषि की पत्नी दिति कश्यप जी से बरदान माँग रही है कि आप मुझे ऐसा पुत्र दें जो इंद्रको मारनें में सक्षम हो क्योंकी इंद्र मेरे पुत्रों को विष्णु से मरवाया था । 
 ** कश्यप जी कहते हैं ** 
^^ इसमें संदेह नहीं कि स्त्रियाँ अपनीं लालसाओंकी कठपुतली होती हैं , सच पूछो तो वे किसी से प्यार नहीं करती । वे स्वार्थवश अपनें भाई ,पति और पुत्र तक को भी मरवा सकती हैं या मार सकती हैं । 
 # भागवत : 9.14 # 
^^ कुरुक्षेत्र में सरस्वती तट पर राजा पुरुरवा की मुलाकात उर्बशी एवं इसकी अन्य पांच सखियों से हुयी । जब उर्बशी पुरुरवाको अपनी ओर आकर्षित होते देखा तब कहती है :---
 ^^ स्त्रियों की मित्रता किसी से नहीं होती । वे भेड़िया जैसा दिल रखती हैं । वे अन्दर से निर्दय होती हैं और तनिक -तनिक सी बात पर चिढ जाया करती हैं ।वे विश्वास दिला कर अपनें स्वार्थ हेतु अपनें पुत्र ,पति , पिता और भाई तक को मरवा सकती हैं । ~~~ ॐ ~~~