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Wednesday, September 3, 2014

भागवत से - 21

<> ऋषभजी इक्ष्वाकु कुलके नहीं थे <> 
● ऋषभ देव को जैन मान्यता में पहले तीर्थंकर के रूप में देखा जाता है और इनको आदिनाथ नाम से भी जाना जाता है । 
 ● ऋषभदेवजको श्रीमद्भागवत -महापुराण में निम्न सन्दर्भों में देखा जा सकता है :-- 
* भागवत : 1.3+3.21+3.22+4.8+ 4.12+5.1+5.2+5.3+5.4+5.5+5.6 +5.7+5.8+5.9+5.19 
 ● भागवत: 5.1-5 3 > यहाँ भागवत कहता है ," ब्रह्मा पुत्र स्वायम्भुव मनु (पहले मनु ) के पुत्र प्रियब्रतका ब्याह विश्वकर्माकी पुत्री बर्हिष्मती से हुआ था । प्रियब्रके पुत्र थे आग्निध्र और आग्निध्रके पुत्र थे नाभि इसप्रकार नाभि स्वायम्भुव मनु के प्रपौत्र थे । नाभि और मेरू की पुत्री मेरु देवी से जन्म हुआ , ऋषभ देव । ऋषभ देवको विष्णुका आठवाँअवतार माना जाता है ।
 ** अब देखते हैं इक्ष्वाकु कुल की रचना । 
# भागवत : 9.1-9.6 > ब्रह्मा पुत्र मरिचिसे कश्यप ऋषिका जन्म हुआ । कश्यपसे विवश्वान (सूर्य ) का जन्म हुआ ।विवश्वानसे सूर्य बंशी क्षत्रिय कुल आगे चला ।सूर्य से सातवें मनु श्राद्धदेव पैदा हुए । श्राद्धदेव पहले संतान हीन थे । ऋषि बसिष्ठ मित्र वरुण यज्ञ से पुत्र पैदा करना चाहा लेकिन इला नामकी पुत्री पैदा हुयी । बसिष्ठ पुत्रीको पुत्रमें बदल दिया जिसका नाम रखा गया सुद्युम्न। सुद्युम्न शिव श्रापसे पुनः स्त्री बन गए और उनसे एवं चन्द्रमा पुत्र बुधके योग से पुरुरवाका जन्म हुआ । पुरुरवासे त्रेता युग प्रारम्भ हुआ और चन्द्र बंशी क्षत्रियोंका कुल आगे चला ।बाद में , शिव आराधना से बसिष्ठ इला स्त्री को पुरुष में बदल तो दिया लेकिन वह कुछ समय स्त्री हुआ करते थे और कुछ समय पुरुष । सुद्युम्न अपनें इस जीवन से दुखी होकर पुरुरवा को राज्य देकर तप करनें हेतु बन में चले गए ।
 ** उधर सूर्य बंशी श्राद्धदेव मनु यमुना तट पर 100 वर्ष तक तप किया और 10 पुत्र प्राप्त किये । श्राद्धदेव मनुके दश पुत्रों में इक्ष्वाकु सबसे बड़े थे ।यहाँ से इक्ष्वाकु कुल प्रारम्भ होता है ।
 ** इक्ष्वाकु कुल (Ikshwaku dynasty ) में श्री राम का जन्म हुआ और पुरुरवा कुल या चन्द्र बंश में चंद्रबंशी क्षत्रिय रूप में कृष्ण का जन्म हुआ । 
<> ऋषभदेव न तो इक्ष्वाकु कुल में थे न चन्द्र कुल में ,इनका कुल इन दोनों कुलों से बहुत पहले प्रारम्भ हो चुका था । इक्ष्वाकु सातवें मनुके पुत्र थे और स्वायम्भुव मनु तो पहले मनु थे उनके प्रपौत्र के पुत्र थे ऋषभ देव जी (स्वायम्भुव मनु के बाद चौथे बंशज ) ।
 <> भागवत : 3.11> 
 1- एक कल्प में 14 मनु होते हैं । 
2- एक मनुका समय = 71.6/14 ( चार योगों का समय ) = (1000×4,320,000) ÷14 वर्ष होता है अर्थात 304,571,428.57142 वर्ष अर्थात लगभग 0.304 billion years. 
# अब आप समझें कि :---
 ऋषभ देव पहले मनुके प्रपौत्रके पुत्र थे और इक्ष्वाकु सातवें मनुके पुत्र थे ऐसी स्थिति में दोनों के समय में कितनी दूरी है ? लगभग 1.824 billion years .
 * ऋषभ देव इक्ष्वाकु से लगभग 1.8 billion वर्ष पहले थे । ** ॐ **