सांख्य दर्शन के 25 तत्त्वों में अलिंग, लिंग, लिंग शरीर , कारण और कार्य तत्त्व
सांख्य दर्शन में सनातन , निर्गुणी एवं शुद्ध चेतन पुरुष और सनातन त्रिगुणी जड़ प्रकृति के संयोग से 23 तत्त्वों की निष्पति बताई गई है जिनसे 14 प्रकार की सृष्टि की उत्पत्ति होती है (देखें , निम्न स्लाइड को ) ।
प्रकृति - पुरुष संयोग से जो 23 तत्व उत्पन्न होते है वे त्रिगुणी एवं जड़ तत्व हैं लेकिन पुरुष ऊर्जा के प्रभाव में चेतन जैसे दिखते हैं। प्रकृति और पुरुष को अलिंग कहते हैं । प्रकृति - पुरुष संयोग से उत्पन्न 23 तत्त्वों (महत्तत्व, अहंकार, 11 इंद्रियां , 05 तन्मात्र और 05 महाभूत) को लिंग कहलाते हैं और लिंग तत्त्वों में 05 महाभूतों को छोड़ शेष 18 तत्त्वों को लिंग शरीर कहते हैं।
लिंग तत्व वे तत्व है जिनका अपने - अपने कारण तत्त्वों में लीन हो जाते हैं। अलिंग तत्व वे हैं जिनका कोई कारण तत्व नहीं होता अतः उनका लय नहीं होता। लिंग शरीर अति सूक्ष्म शरीर है जो आवागमन करता हैं अर्थात जो बार - बार अपने में स्थित पुरुष को कैवल्य दिलवाने हेतु स्थूल शरीर धारण करता रहता है। यहां ध्यान रखवा होगा कि बिना पांच महाभूतों के अर्थात बिना माता - पिता से प्राप्त स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर अस्थिर रहता है।
ऊपर व्यक्त सांख्य के 25 तत्त्वों में पुरुष न कारण है और न कार्य। जो तत्त्व किसी और तत्व को उत्पन्न करते हैं , उन्हें कारण कहते हैं और उत्पन्न होने वाले तत्त्व को कार्य कहते हैं। 11 इंद्रियां और 05 महाभूत केवल कार्य हैं। प्रकृति केवल कारण है। महत्त्व , अहंकार और 05 तन्मात्र , कारण और कार्य दोनों हैं।
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