Thursday, November 21, 2013
कृष्ण भक्त सुदामा और सुदामा
Saturday, November 16, 2013
परीक्षित कथा
Sunday, November 10, 2013
महावीरका जन्म स्थान वैशाली
Friday, November 8, 2013
भागवतमें द्वारका - 01
Wednesday, November 6, 2013
छठ पर्व
● छठ पर्व ●
* पिरामिड सभ्यता जैसे मिस्र और मेक्सिको और भारतके पूर्वी भागके लोगों का सूर्य से गहरा सम्बन्ध है । मैथिलि ऋषि याज्ञवल्क्य अपनें गुरु वैशम्पायनसे अलग हो कर सूर्य की गहरी उपासना की और कई वैज्ञानिक शोध विषयों पर प्रकाश डाला लेकिन उनकी बातें आजके विज्ञानमें कोई ख़ास जगह न बना
सकी । ऐसी कौन सी घटना हो सकती है जिसके प्रभावके कारण ये लोग सूर्यसे जुड़े होंगे ?
* 1613 AD Alfred Wegener एक जर्मन विचारक का मत है कि अबसे लगभग 200 million साल पूर्व में पृथ्वी के टुकडे हुए और तब विभिन्न महाद्वीपों की रचना हुयी ।पृथ्वी जब एक इकाई थी तब इसे ग्रीक भाषा में Pangea कहते थे जिसका अर्थ होता है one piece ।
* अबसे 200 million वर्ष पूर्व भारतका पूर्वी भाग जहाँके लोग छठ मनाते हैं , मेक्सिकोजे साथ जुड़ा हुआ था । अगर आप मेक्सिको जाएँ और वहाँ के कबिले लोगों से मिले तो आप को ऐसा लगेगा जैसे भारत के पूर्वी भाग के लोगों से आप मिल रहे हैं ।
* उस समय कोई ऐसा हादसा हुआ कि पृथ्वी के टुकडे हो गए और बहुत समय तक उन लोगों को सूर्य न दिखा । सूर्य की अनुपस्थिति लोगों में भय उत्पन्न की और लोग सूर्यकी उपासना करनें लगे । वह दिन और आज का दिन यह परंपरा चल रही है और चलती रहेगी ।
~~ ॐ ~~
Saturday, October 26, 2013
भागवत में यह भी है
Thursday, October 24, 2013
भागवत में अक्रूर कौन थे ?
●अक्रूर कौन थे ?●
सन्दर्भ : स्कन्ध - 9 + 10
** 1- ब्रह्मा से अत्रि ऋषि ,अत्रिसे चन्द्रमा , चन्द्रमा और ऋषि बृहष्पतिकी पत्नी तारा से बुध पैदा हुए । ** 2- ब्रह्मासे कश्यप ऋषि ,कश्यपसे विवश्वान (सूर्य ) ,सूर्यसे श्राद्धद्रव मनु हुए । श्राद्धदेवसे इला पुत्री पैदा हुयी जो एक माह सुद्युम्न पुत्र रूपमें रहती थी और एक माह इला पुत्री रुपमें। इला पुत्री और बुधसे पुरुरवा हुए जिनसे चन्द्र बंश चला । पुरुरवा और उर्बशी का मिलन कुरुक्षेत्रमें सरस्वती नदीके तट पर हुआ था । पुरुरवासे 06 पुत्र हुए जिनमें आयु के पौत्र ययाति और शुक्राचार्य पुत्री देवयानी से यदु हुए । यदुके 04 पुत्र हुए जिनमें क्रोष्टा के बंश में आगे विदर्भ हुए । विदर्भ के तीन पुत्रों में क्रथके बंश में शकुनि
हुए । शकुनिके बंशमें सात्वक हुए जिनके 07 पुत्र हुए , उन सात में बृण्णिसे श्वफलक और चित्ररथ
हुये । चित्ररथसे कृष्णके दादा शूरसेन हुए और श्वफलक से 12 पुत्रों में एक हुए अक्रूर ।
* अब आगे *
* गोकुलमें बैल रूपमें आये अरिष्टासुरका अंत हो रहा है और उधर मथुरामें नारदजी कंशको सच्चाई बता रहे है कि कृष्ण , बलराम कौन हैं और वह कन्या जिसे तुम मार रहे थे ,वह कौन थी ?
* अक्रूरजी कृष्ण बंशसे सम्बंधित थे लेकिन रह रहे हैं मथुरामें अतः कंश अक्रूरको ब्रज भेज रहा है ,कृष्ण और बलराम को लेनें हेतु । कंश मथुरामें धनुष यज्ञका आयोजन कर रहा है और यह आयोजन मात्र एक बहाना है ।
* आज नन्द गाँव और मथुराकी दूरी 32 km है और अक्रूरजी इस दूरीको एक दिन में पूरी कर रहे हैं ; वे सुबह चल रहे हैं और सूर्यास्तके समय नन्दके यहाँ पहुंच रहे हैं । नन्दके गौशालाके पास कृष्ण - बलरामजी अक्रूरजी से मिले और सादर उनको घरके अन्दर ले गए ।
*कंश बध के बाद बलराम और कृष्ण अक्रूर जी के घर भी गए ।
* कृष्णकी पत्नी सत्यभामा के पिता हैं सत्राजित जो सूर्यके भक्त थे और सूर्यसे उनको स्यमन्तक मणि मिली थी । कृष्ण उस मणि को द्वारकानरेश उग्रसेन जी को देनें की राय दी पर सत्राजित ऐसा न कर सके। उस मणि को सत्राजित के भाई प्रसेन पहनकर शिकार खेलने बनमें गए और एक शेर उनको मार कर मणि ले ली और अंततः वह मणि जाम्बवान के पास पहुँच गयी । कृष्णका नाम आनें लगा की वे प्रसेन जो मार कर मणि ले लिए हैं अतः कृष्ण मणिका पता करते हैं और 28 दिन तक जाम्बवान से युद्ध करते
हैं , जाम्बवान अपनी पुत्री जाम्बवंतीके साथ उस मणिको कृष्ण को दे देता है । कृष्ण उस मणि को सत्राजित को वापिस करते हैं । कृष्ण और बलदेव हस्तिनापुर आये हैं और उधर द्वारका में अक्रूर और कृतवर्मा शतधन्वाको सत्राजितके खिलाफ तैयार कर रहे हैं , फलस्वरुप शतधन्वा सत्राजित को मारता है । मणि अक्रूर जी के पास रख कर शतधन्वा कृष्ण के भय के कारण भाग निकलता है । कृष्ण - बलराम उसका पीछा करते हैं और मिथिला पूरी के पास पहुंचते पहुंचते सतधन्वा को कृष्ण मारते हैं पर मणि तो उसके पास है नहीं । बलराम कई साल विदेहके पास रहे और कृष्ण द्वारका वापिस आगये । अक्रूरजी से उस मणि को लेकर कृष्ण उग्रसेन को देते हैं ।
* कंश बधके बाद कृष्ण अक्रूरजीको हस्तिनापुर भेजते हैं यह पता लगानें हेतु कि कौरओं का पांडवों के साथ कैसा ब्यवहार है । पांडु की मौत हो चुकी है , धृतराष्ट्र हस्तिना पुरके सम्राट बन गए हैं लेकिन अपनें पुत्रोंके बशमें होनेंके कारण उनका पांडवों के साथ ब्यवहार ठीक नहीं है । अक्रूर कई माह हस्तुनापुर में रहते हैं , स्थिति का अध्यन करनें हेतु और वापिस आकर कृष्ण को वहाँ की स्थिति से अवगत कराये हैं। ~~~ ॐ~~~